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आग का दरिया
नासमझी…नादानी क्या बया करे समझदारों की? जंगल…धरा तो जल हीं रहें हैं. दुनिया ने तरक़्क़ी इतनी कर ली नदी …पानी पर भी आग लगा दी. अपने घर में आग लगे, दो पल भी बर्दाश्त नहीं. बेज़ुबान …