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सूरज ङूब गया
जीवन की शाम हो चली थी, थका-हारा सूरज झुका, थोङा रुका ….गुफ्तगु के इरादे से या शायद फिर से आने का वायदा करना चाहता था धरा से। पर तभी छा गये बीच में काले बादल। अौर बिना रुके….. बिना कुछ क…