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Hazaaron Khwahishein Aise Ke Har Khwahish Pe Dam Nikle
Jagjit Singh हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले मोहब्बत में नहीं हैं फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले डर…