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जयहिन्द… वन्देमातरम्…
समानी व आकृति: समाना हृदयानि व:, समानमस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति – ऋग्वेद हम सबके सामान आदर्श हों, हम सबके ह्रदय एक जैसे हों, हम सबके मनों में एक जैसे कल्याणकारी विचार उत्पन्न हों, ताकि सामाजिक सम…