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बाग़-ए-ग़ुलाब…
धीरे से जाना उस बाग़ में, जहा गुलाब खिलता हो, खुशबू के संग संग कांटोंको, जहा आझमाने मिलता हो * * * कभी ग़म के साये मिलेंगे, कभी खुशियोंकी बारात बारात मिलेगी, शायद खाली हाथ घूमना पड़े, पर तकदीर से मुला…