prasadkulkarni.wordpress.com
दांवत-ए-इश्क़…
दांवत-ए-इश्क़ फरमाइए जरा, बडी जोरो की भूख लगी है, जल्दी से प्यार परोसिये जरा, सदियोंसे उसकी प्यास लगी है. कुछ नमकीन, कुछ तीखा, और कुछ मीठा हो जाए जरा, पाचक छांस, नशीली नज़र…