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ऐ दिल-ए-नादान…
ऐ दिल-ए-नादान, क्यूँ तू इतना खुराफाती है? अभी अभी बिखरे तुकडे सँवारे है, और अभी फिर से बिखर रहा है? क्यूँ तू उस गली जाता है, जहा तेरा इंतज़ार भी नहीं होता, जाने पहचाने रास्तों में भी, क्यूँ है तू अ…