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हे नारद, मेरी सुनो (कविता) - उदय मोहन पाठक (अधिवक्ता)
हे नारद तुम वीणा बजाते हुए प्रभु नाम गाते हुए लोक मे घुमते रहते हो तुम योगी हो संयासी हो तुम्हारा काम तो इस तरह चल जाएगा