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प्रणाम : चारेां महानुभावों को मेरा प्रणाम! –उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)
तब से मुझे मेरी जमींदारी में रहने वाले लोग मुर्ख जमींदार कहते हैं। इसलिए मैं ही सबसे बड़ा मूर्ख हूँ। किसान ने मुझे प्रणाम किया है।