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आवाम की आजादी...
Spread the loveहम आवाम को आजाद कैसे मान लें, सिंहासन पर सीमित परिवार का दौर है। गरीबों को दो जून भोजन नसीब नहीं, GDP बढ़ा रही सरकार का दौर है। हर वस्तु की “कीमत” है इस जमाने में, मूल्य नहीं समझती यह बाजार का दौर है। विकास विकास करके जमीन हथिया रहे, पूंजीपतियों की ग़ुलाम …