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ઓલ્ટર્નેટીવ હિસ્ટ્રી- યું હોતા તો ક્યા હોતા
न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता डुबोया मुझको होने ने,न होता मैं तो क्या होता? हुआ जब ग़म से यूं बेहिस तो ग़म क्या सर के काटने का न होता गर जुदा तन से तो जुनून पर धरा होता हुई मुद्दत के…