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ग़ज़ल का साज़ उठाओ, बड़ी उदास है रात
मैंने ग़ज़ल सुनना तब शुरू किया था जब जगजीत सिंह की एक ग़ज़ल (बड़ी हसीं रात थी – ‘दा लेटेस्ट’ एल्बम se) मैंने किसी gathering में सुनी थी. ये शायद 1993 की बात है. उससे पहले बस ‘निका…