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Sri Ram has assumed a form with attributes yielding to the love of His devotees.
जय श्रीराम जय श्रीहनुमान अति विचित्र रघुपति चरित जानही परम सुजान । जे मतिमंद विमोह बस ह्रदय धरहि कछु आन ।। दोहा 49 – बालकाण्ड – श्रीरामचरितमानस – श्रीतुलसीदास ।। Exceedingly myste…