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धरती का मानव
छान रहा, सारा ब्रह्मांड, यह धरती का मानव, ले जीवन की अभिलाषा, तोड़ धरती का विश्वास, रहा चिंघाड़ खुले अंतरिक्ष में, यह धरती का मानव, भेद दिए सारे ग्रह, जीवन-तत्वों की आस, जल,वायु, मिट्टी, गगन और धरत…