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YAADEN/यादें - Madhusudan Singh
Image Credit : Google. कितने निर्मोही लोग मगर,फिर भी है उनसे मोह, मिटाए भी नहीं मिटते, हैं उठते दिल में शोर,मिटाए भी नहीं मिटते। सूरज नित जाकर आता, चन्दा भी चमक दिखाता, ऋतुएँ भी जाकर आती, पतझड़ में खुशबु लाती, पर बैठे वे किस छोर,जहाँ से टूटे दिल के डोर, नहीं जोड़े फिर जुड़ते, हैं …