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VIDHWA/विधवा - Madhusudan Singh
Image Credit : Google कभी कभी मन व्याकुल होता अब भी पर समझाए कौन ? आँखों से खोए सपने मुस्कान को वापस लाए कौन? कलतक जन्नत फीकी जिससे सेज नहीं वह भाती, काँटे क्या मखमल भी पलपल फूल को डंक चुभाती, नित रिसते सैलाब नयन, धीरज का बाँध बंधाये कौन? आँखों से खोए सपने मुस्कान …