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VARSHA/वर्षा - Madhusudan Singh
Image Credit : Google वसुधा पर तेरा आ जाना, मरुस्थल का भी खिल जाना, छोड़ साथ बादल का वर्षा, वसुधा से यूँ मिल जाना, नहीं भूल सकती प्यासी भू, कह दूँ क्या हर्षित कितना हूँ, मन-मंदिर धुन-तान बजा अब, तुमसे ही अरमान सजा अब, जैसे तारे आसमान में रोज चमकते, झीलमिल,झीलमिल, ऐ वर्षा तुम भी …