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VANDE MATARAM/वंदे मातरम - Madhusudan Singh
Image Credit : Google कोस-कोस पर पानी बदले,पाँच कोस पर वाणी, सिंधु,सुरसरि की भूमि वह ज्ञान की जहाँ रवानी, युगों,युगों की जहाँ धरोहर,रंग,विरंगे धर्म मनोहर, उस भारत की मिट्टी का हम तिलक लगाते हैं, हिन्द के हम रक्षक सारे एक सुर में गाते हैं, वंदे मातरम,वंदे मातरम,वंदे मातरम,वंदे मातरम।। पीड़ गुलामी की कैसी हम उसको …