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Ummeed - Madhusudan Singh
देख ले दर्द में कैसा हाल, हैं आँखे भीगी की भीगी, बह रही उर बीच कैसी धार,कंचुकी गीली की गीली। देखकर घर का बुरा हाल. है तूने छोड़ दिया घर द्वार, है गुजरे याद में कितने साल, संदेसा आया ना एक बार,धैर्य है टुटा, याद है कल की सारी बातें, तेरी प्रेम भरी सब यादें, …