madhureo.com
Tadap - Madhusudan Singh
समझ में ना आता ये तेरी खुदाई, ये कैसा मिलन है ये कैसी जुदाई, मिलते हैं लोग क्यों निशान छोड़ जाते है, तड़पने को सारा जहान छोड़ जाते हैं | तड़पने को सारा जहान छोड़ जाते हैं || पलभर बिछड़कर मुश्किल था जीना, जीवन का ये डोर किसने है छीना, कैसे वे बीच मजधार छोड़ …