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SOCH/सोच - Madhusudan Singh
Image Credit :Google मुल्क वही इंसान वही,एक शोषित एक शासनकर्ता, बीत गयी सदियाँ फिर भी,ना हम बदले ना तुम बदला। जंग लड़े हैं हमने कितने,भूख कभी बिमारी से, देख रहे थे मरते बच्चे,बेबस और लाचारी से, बच्चों के हालात बदलने,सोच लिया रण में जाना, भूख से मरने से बेहतर है,गोली खाकर मर जाना, कब सुधरेगी …