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Siskiyaan - Madhusudan Singh
दिल तड़पता रहा हम तरसते रहे, अश्क आँखों से पल-पल बरसते रहे, जिनको पूजा न जाने कहाँ खो गया, हाय किस्मत मेरा,वेवफा हो गया।। एक उपवन में हम उनसे ऐसे मिले, एक डाली पर जैसे कलि दो खिले, हम किनारें,नदी की तरह वे मगर, जिंदगी को न जाना ये क्या हो गया, कैसे किश्मत मेरा,वेवफा …