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Satyameo Jayate - Madhusudan Singh
अँधेरे को अँधेरा,उजाले को उजाला भाता है, किसी को सूरज किसी को चाँद रास आता है, निरंकुश तो जमाने में हमने भी बहुत देखें हैं, सत्य के आगे तो अशोक भी हार जाता है। स्वार्थ जब भी बढ़ा,बादल की तरह अम्बर में, सत्य ढकता रहा सूरज की तरह अम्बर में, लोग निरंकुशता में सत्य भूल …