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Sapne/सपने - Madhusudan Singh
कितने जुड़ते हैं संग कई रूठ जाते हैं, कितने सपने साकार होकर टूट जाते हैं, हँस ले जब तक जमाना हँसाये तुझे, रो ले जब दर्द दिल को सताए तुझे, कभी आँखों से आँसूं भी रूठ जाते हैं, कितने सपने साकार होकर टूट जाते हैं। !!!मधुसूदन!!! kitane judate hain sang kaee rooth jaate hain, kitane …