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SANNAATAA/सन्नाटा - Madhusudan Singh
Image Credit : Google मंजर की महक,आम के टिकोरे, फूलों की खुशबू,वसन्त के हिलोरे, वो झूले वो पीपल की छाँव कहाँ है, कभी छोड़ आए जन्नत वो गाँव कहाँ है। जहाँ मीठी सी भोर जहाँ मस्ती की शाम, कभी पीकर मतंग भंग गाते थे गान, जहाँ गलियों में रंग,जहाँ बजता मृदंग, फाग गाते थे उड़ता …