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SANDESH PREM KA - Madhusudan Singh
दीप से जलती बाती बोली, हम भी आ कुछ कर जाएं, जबतक साँस हमारे हम, आ जग को रौशन कर जाएं। जगह-जगह पर घोर अंधेरा, छाया है जिन राहों में, चला बटोही राह पकड़, आ बिछ जाएं उन राहों में, अंत हमारा भी निश्चित, उससे पहले कुछ कर जाएं, जबतक साँस हमारे हम, आ जग …