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Saath-Saath - Madhusudan Singh
कितनी हसीन दुनियाँ मेरी, खुशनसीब हम अगर साथ हो, गर साथ हो जमीं पे नहीं रहते हैं कदम अगर साथ हो। वे आग की दरिया हैं,तो हम बर्फ का गोला, तिल,तिल पिघल रहे जलाता आग का शोला, हैं आग की मलिका जलाना उनका काम है, हम बर्फ पिघलकर बुझाना मेरा काम है, है ग्रीष्म के …