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Quote..30 - Madhusudan Singh
तवे से जले माँ के हाथ नहीं दिखे, पसीने से भींगे माँ के रुमाल नहीं दिखे, थोड़ी नमक क्या कम थी रोटियाँ फेंक दी, उन रोटियों में माँ के प्यार नहीं दिखे। दौड़ पड़ी पुत्र को मनाने लगी, फिर से नई रोटियाँ बनाने लगी, बूढ़ी थी मगर खुद का हाल नहीं दिखे, उस माँ के …