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Prem Aavedan/प्रेम आवेदन - Madhusudan Singh
हुए अब कितने हम मजबूर, तुम्हारे बिन दुनियाँ से दूर, ये अँखिया इंतेज़ार में जागी, भेज रहे तुमको हम पाती, पाती में अश्कों की धार,ये चुटका पढ़ लेना, शब्द अश्कों में लिपटे यार,चुटका पढ़ लेना। अंखियां गीली मन है प्यासा, उपवन मरुस्थल सी आजा, नीले अम्बर,तपती धूप, सूखे ताल,तलैया,कूप, मगर उम्मीद अभी मन बाकी,सागर भर …