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Politics  - Madhusudan Singh
देश बुरा ना हम बुरे,ना बुरा है अपना संबिधान, राजनीत की चक्की में है,फिर भी पीस रहा इंसान। सत्तर साल की हुयी आजादी, क्या खोये क्या पाये हम, आओ देखें गुलशन अपना, क्या बोये क्या पाये हम, खेत बिना पानी के अब भी, मजदूरों का हाल बेहाल, बिद्यालय से शिक्षा गायब, बेरोजगार की लगी कतार, …