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MILAN/मिलन - Madhusudan Singh
Image Credit :Google मन दर्पण उस दर्पण में हम तेरी छवि बसाए, तुम आ जाओ ना, पुलकित रोम रोम खिल उठते दिल की कलियाँ सब मुरझाए, तुम आ जाओ ना। तुम आते तो लगता ऐसा पतझड़ में मधुमास हो जैसा, तेरा जाना दूर छोड़,नयनों में मेघ समाते, तुम आ जाओ ना, पुलकित रोम रोम खिल …