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Unexpected - Madhusudan Singh
Image credit: Google क्यूँ पिंजर बन्धन खोल दिया–? थी एक कटोरी छोटी सी, कुछ उसमे दाना-पानी थी, लोहे की इन्हीं सलाखों में, अब मेरी दुनियाँ सारी थी, माना नफरत के काबिल तूँ, फिर भी अपना मैं बोल दिया, मैं भूल गयी थी दुनीयाँ को, इस घर से नाता जोड़ लिया, क्या हमसे तेरा स्वार्थ खतम, …