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Manjil Ki Chahat - Madhusudan Singh
​रास्ते तब ख़त्म होते हैं जब, मंजिल करीब आती है, चौराहे पर खड़े हर राही को, मंजिल भी पास बुलाती है, हम दीवाने मंजिलों के कहाँ खो जाते हैं हारकर क्यों राहों में फिर हम जाते हैं, कितना फौलादी था कल का वो इंसान, सपनों में देखा था जिसने एक जहान, फिर उठा तो वो …