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Maharana Pratap (Part-1) - Madhusudan Singh
Image Credit : Google पराधीन रहना ना जाना, जीते जी था हार ना माना, त्याग सुख महलों की जिसने,खाई रोटी घास की, दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२| स्वर्णअक्षरों में अंकित,इतिहास भी शीश झुकाता है, जो मातृभूमि की शान में अपनी,हँसकर शीश कटाता है, धरती वीरों से भरी पड़ी,इतिहास भरी गाथाओं से, भारत …