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Mahatvakanksha/महत्वकांक्षा - Madhusudan Singh
Image credit:Google है अपना कोई आस-पास, है हृदय भरी मक्कारी, घबराहट और तलवार साथ में, ले रखी दोधारी, हम अडिग खड़े हैं पास निहत्थे, खुद ही मिट जाने को, या बिना अस्त्र के ही रण में, कुछ अद्भुत कर जाने को, है मन मे बस एक सोच, रहा ना कोई यहाँ रहेगा, है आज यहाँ …