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Maharan Pratap (Part -3) - Madhusudan Singh
Click here to Read Part-2 Image Credit : Google पराधीन रहना ना जाना, जीते जी वह हार ना माना, त्याग सुख महलों की जिसने,खाई रोटी घास की, दोहराता हूँ कथा वीर उस महाराणा प्रताप की|२| मुग़ल बादशाह अकबर का राणा आँखों के काँटा थे, एकछत्र शासन करने में महाराणा ही बाधा थे, बड़े बड़े राजे-रजवाड़े …