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MAA TUMSA NA KOYEE/माँ तुमसा ना कोई - Madhusudan Singh
Image Credit : Google जीवन के इस ढलते क्रम में,दुनियाँ को मैं देख लिया, अरमानों के सजे पुलिंदे,हर रिश्तों में देख लिया, सबकी चाहत बीच खड़ा मैं,स्वार्थ,प्रेम के बीच पड़ा मैं, सबकी रही शिकायत पल-पल,कुछ खोयी सी चाहत हरपल, ख्वाहिश सबके दिल में हमसे,मांग अधूरी रहती है, प्रयत्न निरर्थक खुश रखने की फिर भी दूरी …