madhureo.com
LACHAARI/लाचारी - Madhusudan Singh
Image Credit : Google वाह रे तेरे वादे निर्धनता समझे लाचारी पान खिला फाँसी की कैसी खूब किया तैयारी। सदियों से झांसे में आकर हम पीछे पछताए हैं, लोभ में तेरे आकर हमनें खून के अश्क बहाए हैं, छले गए हम सदियों से सब समझ रहे मक्कारी, पान खिला फाँसी की तूने खूब किया तैयारी। …