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KYA LIKHUN/क्या लिखूँ - Madhusudan Singh
प्रेम लिखूँ या किसी का ममत्व, नफरत लिखूँ या किसी का अपनत्व, अपनी उमड़ती भावनाओं को, किस ओर ले जाऊँ, ऐ कविता तूँ ही बता तुझे किन शब्दों से सजाऊँ? चाहूँ तो लिख ना पाऊँ, ना लिखूँ तो चैन से रहने नही देती, कभी शरमा कर, कभी मुस्कुराकर, कभी क्रोध में, कभी शोक में,ना लिखूँ …