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Mera Gaon/मेरा गाँव - Madhusudan Singh
Image credit: Google किन शब्दों में दर्द सुनाऊँ, हालत कैसे किसे दिखाऊँ, हाय दुर्दशा कृषक,खेत,खलिहान की, आकर देख दशा कैसी है मेरे गाँव की।2 फ़टी पाँव है धरा जेठ सी, चमड़े हो गए काले, पीठ,पेट सट एक हुए, फिर भी हिम्मत ना हारे, सींच खून से पौध उगाते, धूप में बदन जलाते, तब जाकर खलिहान …