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Kisaan aur Mansoon - Madhusudan Singh
मानसून हर बार कडा एक्जाम लेता है, मज़बूरी है कृषक का सीना तान लेता है| ग्रीष्म का तांडव देख के, धरती का भी फटा कलेजा था, जीव,जंतु संग मानव पर भी, मौत ने डाला डेरा था, इंतजार अब ख़त्म मेघ बौछार करता है, मज़बूरी है कृषक का सीना तान लेता है| सूखे चारे खा खाकर …