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Kuchh Kali Qaid Guldaste me - Madhusudan Singh
Image credit:Google पुष्प महकती इठलाती थी, कभी शान से गुलशन में, किश्मत पर है वही सिसकती, आज कैद गुलदस्ते में, कलि बनी कब फूल न जाना, जा बैठी गुलदस्ते में, इठलाना,बलखाना सारा,भूल गयी गुलदस्ते में। खुशबु रखती पास महकती, जहां,कहीं भी वो जाती, अपने संग संग मरघट को भी, गुलशन सा है महकाती, मगर कद्र …