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Kaisa Shreshth/कैसा श्रेष्ठ - Madhusudan Singh
Image Credit :Google सभ्य अगर होते हैं ऐसे, पग-पग पर जँह भय और संसय, जहाँ पता ना कहाँतलक गिर जाएँगे हमलोग, जहाँ सशंकित हमसे,बहना,माता,वृद्ध,किशोर, फिर तो हमसे बेहतर थे सच में कल के जंगल के लोग।1 राह भटक एक परे लोक से, यहाँ मुसाफिर आया, गली-गली में मन्दिर मस्जिद देख बहुत चकराया, देखा सबके घर …