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Kaash....Ek Kachot - Madhusudan Singh
जैसे थे हम अच्छे थे, वैसा ही रहने देते, जाति-धर्म,का भेद मिटा,कुछ प्रेम का तोहफा देते || याद है बचपन की सब बातें, साथ में खेला करते थे, हिन्दू-मुस्लिम,जात-पात का, मतलब नहीं समझते थे, घर में मिलती डांट सजा, हम कहाँ सुधरनेवाले थे, मिले नहीं गर सुबह कहाँ फिर, दिन गुजरनेवाले थे, घरवाले सब …