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JINDGI TUN KAUN MAIN KAUN HUN - Madhusudan Singh
Image Credit : Google जिंदगी तूँ कौन है मैं कौन हूँ बतला मुझे, है कहाँ मेरा ठिकाना ये जरा समझा मुझे। जब से पाया पाँव मैं चलता रहा बढ़ता रहा, विघ्न कितने रास्तों में आए मैं लड़ता रहा, मिल गयी मंजिल मगर फिर क्यों उदासी साथ में, जश्न छाया चंद पल फिर क्यों वीरानी पास …