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JINDAGI EK PAHELI/जिंदगी एक पहेली - Madhusudan Singh
Image Credit : Google कल भी पहेली थी अबूझ,अब भी पहेली जिंदगी। कई गम मगर हंसते रहे,हर दर्द हम सहते रहे, चलते रहे पर मौन हम,अबतक न समझे कौन हम, है भीड़ पर तन्हां खड़े,कितनी अकेली जिंदगी, कल भी पहेली थी अबूझ,अब भी पहेली जिंदगी। हर क्षण यहाँ जद्दोजहद जीवन-मरण के सामने, संघर्ष करते हम …