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Jindagi  - Madhusudan Singh
Image Credit : Google ऐ जिंदगी कितनी छोटी,कितनी हँसीन है तूँ फूलों से भी नाजुक और कमसिन है तूँ, सहजता से जिया तुझे बचपन से अभी तक, होठों की मुश्कान तूने बिखेरा है जमीं पर, खुशियाँ बहुत है,आसमाँ क्यों दिखाते हो, बचपन के जाते नई जहाँ क्यों दिखाते हो, बहुत ही हँसीन है तू ऐ …