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Jhutha Khwab - Madhusudan Singh
वह बेवफा ही क्या जो साथ निभा दे, वह नेता ही क्या जो वादा निभा दे, दोनों एक जैसे मुस्कुराते हैं, एक यादों के सहारे छोड़, वापस नहीं आता, दूजा, अच्छे दिन का ख्वाब दिखा, पाँच साल बाद नजर आता है, दोनों झूठे और धूर्त हैं, जानते हुए भी बिबस हम, यादों के समन्दर में …