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Jiwan Garib ki - Madhusudan Singh
Image credit: Google छोटे,छोटे पाँव मेरी बाली थी उमरिया,2 क्या जानु मैं होती थी क्या शादी की उमरिया, छोटे,छोटे पाँव मेरी बाली थी उमरिया ।2 माँ-बाबूजी बैठे रहते, हरपल दोनों साथ में, इतना गुमशुम देख रही थी, उनको पहली बार मैं, मुझे बुलाकर बोले बिटिया, अब मत जाना बाग में, हाथ तुम्हारे पीले होंगे, जाना …