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AAHAT/आहट - Madhusudan Singh
Image Credit: Google एक खुशबु थी पहचानी सी, अंतर्मन को झकझोर गई, थी धूल पड़ी जिन पन्नों पर, उसकी परतों को खोल गई।। थी आँखों मे मुश्कान अभी, होठों पर फूल सी लाली थी, थी आज दिवाली सी मन में, बर्षों से जहाँ बिरानी थी, वह खुशबु तेज हुई पल में, मन-मंदिर फाटक तोड़ गई, …